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हरिभक्त कटुवाल (1935–1980) नेपाली साहित्य के उन अमर कवियों में से एक हैं, जिनकी कविताओं ने हजारों पाठकों के हृदय को छू लिया। वे न केवल एक कवि थे, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक विद्रोही स्वर थे, जो प्रेम, पीड़ा, मातृभूमि की याद, पहचान की खोज और सामाजिक चेतना को अपनी कविताओं में पिरोते थे।
🌱 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
हरिभक्त कटुवाल का जन्म असम, भारत में एक गोर्खा परिवार में हुआ था। भारतीय गोर्खाओं की पहचान संबंधी समस्याओं, सामाजिक संघर्षों और मातृभूमि से दूरी ने उनके लेखन को गहराई दी।
शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे साहित्य की ओर आकर्षित हुए और प्रारंभ से ही लेखन में रुचि दिखाई।
✍ साहित्यिक यात्रा
हरिभक्त कटुवाल की साहित्यिक यात्रा एक भावनात्मक ज्वार की तरह रही, जिसमें जीवन की हर परत – प्रेम, विछोभ, पीड़ा, अस्थित्व और सामाजिक सवाल – समाहित थे।
❤ 1. भावनात्मक गहराई और प्रेम की अभिव्यक्ति
उनकी कविताएं प्रेम और पीड़ा से सराबोर होती थीं।
उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ –
> “यो जिन्दगी खै के जिन्दगी…”
(यह ज़िंदगी आखिर है क्या…)
एक ऐसी करुण पुकार है जो हर युवा हृदय को छू जाती है।
🔥 2. सामाजिक चेतना और पहचान की खोज
कटुवाल केवल प्रेम कवि नहीं थे। उन्होंने भारतीय नेपाली समाज की सामाजिक उपेक्षा, पहचान के संकट और राजनीतिक अस्पष्टता पर भी अपनी कलम चलाई।
उनकी कविताएं गोर्खाओं की आवाज़ बनीं, जो अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे थे।
🇳🇵 3. नेपाल से संबंध
भारत में जन्मे होने के बावजूद, हरिभक्त कटुवाल ने नेपाली साहित्य में गहरी पकड़ बनाई। वे कुछ समय के लिए काठमांडू में भी रहे, जहाँ उन्होंने रेडियो नेपाल, गोरखापत्र आदि में काम किया।
नेपाल में उन्हें एक बड़े साहित्यकार के रूप में सम्मान मिला और वे नेपाली साहित्य के महान स्तंभों में गिने गए।
🥀 4. व्यक्तिगत संघर्ष और टूटन
उनका जीवन निजी तौर पर काफी संघर्षमय रहा। आर्थिक कठिनाइयाँ, नशे की लत, अकेलापन और भावनात्मक विछिन्नता उनके जीवन का हिस्सा बन गए थे।
यही दर्द उनकी कविताओं में झलकता है, जो उन्हें आम कवियों से अलग बनाता है।
📚 प्रमुख कृतियाँ
हरिभक्त कटुवाल की कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं:
“यो जिन्दगी खै के जिन्दगी”
“मेरो मा” (माँ के लिए समर्पित)
“परिवेश”
“बिचार भित्र”
“आवाजहरु”
“निर्झर”
इनके अलावा उन्होंने निबंध, गीत, और नाटक भी लिखे।
🌟 विरासत और सम्मान
1980 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी साहित्यिक विरासत आज भी जीवित है।
उनकी कविताएँ शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल हैं, और उन पर आधारित नाटक, डॉक्यूमेंट्री, तथा साहित्यिक समारोह आयोजित किए जाते हैं।
उन्हें याद किया जाता है:
एक क्रांतिकारी कवि के रूप में
भारतीय गोर्खा समाज की आवाज़ के रूप में
नेपाल और भारत के बीच साहित्यिक पुल के रूप में
और युवा कवियों के प्रेरणास्रोत के रूप में
📝 निष्कर्ष
हरिभक्त कटुवाल की साहित्यिक यात्रा केवल कविताओं की यात्रा नहीं थी, बल्कि यह एक भावनात्मक और सामाजिक क्रांति थी।
उन्होंने जिस गहराई से शब्दों में जीवन की सच्चाई को उतारा, वह उन्हें अमर बना देता है।
वे केवल एक कवि नहीं थे –
वह एक भावना थे, एक युग की आवाज़ थे, और आज भी उनके शब्द हमारे मन में गूंजते है l
